क्या RCC छतें कभी लीक नहीं होतीं? जानिए एक 10 साल पुराने रिसॉर्ट की कहानी

क्या आप भी सोचते हैं कि RCC छत को वाटरप्रूफिंग की जरूरत नहीं? इस केस स्टडी में जानिए कैसे एक 10 साल पुराने रिसॉर्ट में सही स्लोप और कास्टिंग न होने के कारण भारी लीकेज हुआ। Shriyansh Buildcom ने Micro-Concrete, GP2 Grouting और PU Elastomeric Coating की मदद से इस समस्या का परमानेंट समाधान निकाला और 12 साल की वारंटी प्रदान की। पूरी प्रोसेस समझने के लिए पढ़ें।

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर उन्होंने RCC (Reinforced Cement Concrete) की छत डलवा ली है, तो अब लीकेज की कोई समस्या नहीं आएगी। लेकिन यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है। लीकेज का संबंध सिर्फ RCC से नहीं, बल्कि इस बात से है कि छत की Casting कैसे हुई है।

आज हम बात करेंगे Shriyansh Buildcom के एक खास प्रोजेक्ट की, जहाँ हमने एक 10 साल पुराने रिसॉर्ट की छत का सफल ट्रीटमेंट किया।

RCC होने के बावजूद लीकेज क्यों होता है?

इस प्रोजेक्ट के दौरान हमने पाया कि छत की कास्टिंग के समय कुछ गंभीर गलतियां हुई थीं:

  • Honeycombing: कास्टिंग के वक्त प्रॉपर Vibrating न होने के कारण कंक्रीट में छोटे-छोटे छेद (Hollow spaces) रह जाते हैं, जिन्हें ‘हनीकॉम्ब’ कहते हैं। यहीं से पानी रिसना शुरू होता है।

  • Temperature Issues: अगर बहुत ज्यादा गर्मी में कास्टिंग की जाए, तो सीमेंट को सेट होने का सही समय नहीं मिलता, जिससे उसमें Hairline Cracks आ जाते हैं।

  • PCC & Sloping की कमी: इस रिसॉर्ट में सबसे बड़ी गलती यह थी कि RCC के ऊपर PCC (Plain Cement Concrete) नहीं की गई थी और छत पर सही Slope (ढलान) नहीं था। इस वजह से पानी एक जगह इकट्ठा होता था और धीरे-धीरे सरियों (Steel Bars) में जंग लगने लगी थी।

Shriyansh Buildcom का टेक्निकल समाधान: Case Study

जब हमारी टीम ने साइट का इंस्पेक्शन किया, तो हमने पाया कि सिर्फ कोटिंग करने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए एक स्ट्रक्चरल रिपेयर की जरूरत थी:

1. Surface Grinding & Cleaning

सबसे पहले पूरी छत की Grinding की गई ताकि पुरानी धूल और कमजोर सीमेंट को हटाया जा सके और एक मजबूत सतह मिले।

2. Micro-Concrete का उपयोग

हमने स्लोप बनाने के लिए साधारण कंक्रीट की जगह Micro-Concrete का उपयोग किया।

  • फायदा: यह Non-Shrinking होता है (सूखने पर सिकुड़ता नहीं है)।

  • इसकी मजबूती साधारण कंक्रीट से कहीं ज्यादा होती है और इसमें Curing (तड़ाई) की जरूरत नहीं पड़ती।

3. Drainage & Core Cutting Treatment

जहाँ पानी के पाइप थे, वहाँ अक्सर लीकेज का डर रहता है। हमने पाइप के चारों ओर Core Cutting करके उसे GP2 (Multipurpose Grout) से सील किया, ताकि ड्रेनेज पॉइंट से कभी पानी न रिसे।

4. PU Elastomeric Coating with Geotextile Mesh

वाटरप्रूफिंग के लिए हमने PU (Polyurethane) Elastomeric Coating का इस्तेमाल किया। इसे हमने Geotextile Fiber Mesh के साथ लगाया।

  • Extra Life: कंपनी आमतौर पर इसकी 12 साल की वारंटी देती है, लेकिन Fiber Mesh के इस्तेमाल से इसकी लाइफ बढ़कर 15 से 20 साल तक हो जाती है।

  • यह कोटिंग Waterproofing के साथ-साथ Heat Proofing का भी काम करती है।

निष्कर्ष: 12 साल की वारंटी और मानसिक शांति

हमने इस रिसॉर्ट प्रोजेक्ट को 12 साल की वारंटी के साथ पूरा किया। आज डेढ़ साल बाद भी, वहां भारी बारिश और गर्मी के बावजूद कोई समस्या नहीं आई है।

मकान मालिक ध्यान दें: कॉन्ट्रैक्टर की सलाह पर न जाएं!

अक्सर आपके ठेकेदार कहेंगे कि “अभी नया मकान है, वाटरप्रूफिंग की जरूरत नहीं है।” लेकिन सच्चाई यह है कि मकान बनते समय वॉटरप्रूफिंग करवाना सबसे ज्यादा किफायती और फायदेमंद होता है। इससे आपके स्ट्रक्चर की लाइफ बढ़ती है और भविष्य में होने वाले बड़े खर्चों से बचाव होता है।

हमेशा याद रखें: वॉटरप्रूफिंग किसी भी आम आदमी से न करवाएं। हमेशा एक Certified Professional से संपर्क करें जिसे प्रोडक्ट्स और उनकी टेक्निकल कंडीशन का सही अनुभव हो।

अपनी छत को सुरक्षित बनाने के लिए आज ही Shriyansh Buildcom से एक्सपर्ट कंसल्टेशन लें।

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