50 साल पुरानी बिल्डिंग की छत का पक्का इलाज: श्री राजाराम आश्रम (लूनी) का केस स्टडी

क्या पत्थर की पट्टियों वाली छत का लीकेज रुकना नामुमकिन है? लूनी के 50 साल पुराने राजाराम आश्रम में Shriyansh Buildcom ने अपनी एडवांस PU Elastomeric Coating और 7-Step Technical Process से भारी सीपेज को जड़ से खत्म किया। जानिए कैसे हमने थर्मल एक्सपेंशन की समस्या को मात देकर 100% वॉटरप्रूफिंग रिजल्ट हासिल किया।

पुराने समय में कंस्ट्रक्शन के दौरान छतों में Metal Bars और Stone Slabs का उपयोग किया जाता था, जिसे हम आम भाषा में ‘पत्थर की पट्टियां’ और ‘लोहे के गाटर’ कहते हैं। हालाँकि ये छतें बहुत मजबूत होती हैं, लेकिन समय के साथ इनमें एक बड़ी समस्या आती है—Thermal Expansion

आज हम बात करेंगे लूनी (राजस्थान) के श्री राजाराम आश्रम प्रोजेक्ट की, जहाँ 50 साल पुरानी बिल्डिंग में भारी Leakage और Cracks की समस्या थी। कई बड़े ठेकेदारों के फेल होने के बाद, Shriyansh Buildcom ने इस चुनौती को कैसे स्वीकार किया, आइये जानते हैं।

समस्या: लोहे के गाटर और पत्थर की पट्टियों में लीकेज क्यों होता है?

राजस्थान की भीषण गर्मी में लोहा (Metal) गर्म होकर Expand होता है और सर्दियों में सिकुड़ जाता है। इस निरंतर मूवमेंट के कारण:

  • पत्थर और लोहे के बीच के Joints खुल जाते हैं।

  • छत पर बड़े Cracks आ जाते हैं।

  • बारिश का पानी इन दरारों से होकर Heavy Seepage पैदा करता है।

  • छत पर काली काई (Algae) जम जाती है, जो छत की उम्र और कम कर देती है।

राजाराम आश्रम में पहले भी दो कॉन्ट्रैक्टर्स ने SBR Coating और Elastomeric Coating की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने V-Groove ट्रीटमेंट नहीं किया, जिससे दरारें वापस खुल गईं।

Shriyansh Buildcom का 7-Step एडवांस सॉल्यूशन

हमारी टीम ने साइंटिफिक तरीके से इस प्रोजेक्ट पर काम किया:

Surface Cleaning & Scraping: सबसे पहले पूरी छत से काली काई और पुरानी कोटिंग को मशीन से साफ किया गया ताकि सरफेस एकदम साफ हो जाए।

V-Groove Cutting: मेटल बार्स के साथ वाले मुख्य जॉइंट्स पर हमने 6-inch का V-Groove बनाया। यह स्टेप क्रैक को अंदर से भरने के लिए सबसे जरूरी है।

SBR Priming: पुराने चूने और पत्थर की सतह को नए मटेरियल के साथ जोड़ने के लिए SBR Priming Coat लगाया गया।

PU Hybrid Sealant & Micro-Concrete: जॉइंट्स को लचीला बनाए रखने के लिए उसमें PU Hybrid Sealant भरा गया और उसके ऊपर Micro-Concrete से मजबूती दी गई।

Bonding Coat: पूरी छत पर दोबारा SBR Coating की गई ताकि अगली लेयर छत से मजबूती से चिपक सके।

PU Elastomeric Coating & Geotextile Fiber Mesh: हमने Geotextile Fiber Mesh के साथ PU Coating की 3 Layers अप्लाई कीं। यह एक वॉटरप्रूफ ‘रबड़’ जैसी परत बना देता है जो बिल्डिंग के मूवमेंट के साथ खिंच सकती है पर टूटती नहीं।

Heat Proofing Finish: अंत में सफेद रंग की टॉप लेयर लगाई गई, जो Waterproofing के साथ-साथ Heat Proofing का काम भी करती है।

नतीजा: 100% एक्यूरेसी और संतुष्टि

आज इस प्रोजेक्ट को पूरा हुए एक साल से ज्यादा समय हो गया है। राजस्थान की भीषण गर्मी और भारी बारिश के बावजूद:

  • छत पर कहीं भी Seepage या Leakage नहीं है।

  • आश्रम के अंदर का तापमान भी पहले से कम रहता है।

  • क्लाइंट का फीडबैक 100% Positive रहा।

प्रोफेशनल सलाह: “सस्ते जुगाड़” से बचें

आजकल सोशल मीडिया पर Transparent Glue या Single Spray के विज्ञापनों की भरमार है, जो दावा करते हैं कि एक बार में लीकेज रुक जाएगा। लेकिन याद रखें, ये परमानेंट सॉल्यूशन नहीं हैं।

हमेशा एक Technical Expert या Professional Waterproofing Team से ही काम करवाएं जो साइट विजिट करके समस्या की जड़ को समझे और आपको Warranty के साथ काम करके दे।

क्या आपकी छत में भी लीकेज है? आज ही Shriyansh Buildcom से संपर्क करें और अपनी प्रॉपर्टी को सुरक्षित बनाएं।

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